सोमवार व्रत विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है। यह व्रत हर सोमवार को रखा जाता है, खासकर सावन (श्रावण) मास में इसका महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है। इस व्रत को रखने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।
सोमवार व्रत का धार्मिक महत्व:
- शिव कृपा की प्राप्ति – सोमवार को व्रत रखने से शिवजी जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।
- सौभाग्य और विवाह की प्राप्ति – कुंवारी कन्याएँ अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
- वैवाहिक जीवन में सुख – विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख के लिए यह व्रत करती हैं।
- कर्मों का शुद्धिकरण – व्रत से आत्मशुद्धि होती है और पाप नष्ट होते हैं।
- धन और स्वास्थ्य की प्राप्ति – सोमवार व्रत से धन, आरोग्य और मानसिक शांति मिलती है।

व्रत की विधि (संक्षेप में):
- प्रातः स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।
- व्रत का संकल्प लें।
- भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें (शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, अक्षत, धतूरा आदि चढ़ाएँ)।
- शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
- दिनभर उपवास रखें (निर्जल, फलाहार या जलाहार व्रत अपनी सामर्थ्य के अनुसार)।
- शाम को फिर से पूजा करें और व्रत कथा सुनें।
- अगले दिन पारण (व्रत खोलना) करें।
विशेष जानकारी:
- श्रावण सोमवार विशेष फलदायी माने जाते हैं।
- सोलह सोमवार व्रत भी एक विशेष रूप से मान्यता प्राप्त व्रत श्रृंखला है जिसमें लगातार 16 सोमवार तक व्रत रखा जाता है।
सोमवार व्रत एक अत्यंत शुभ और फलदायक व्रत है, और इसे कोई भी व्यक्ति रख सकता है जो भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना चाहता है। नीचे कुछ विशेष लोग दिए गए हैं जिन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए:
1. कुंवारी कन्याएँ (Unmarried Girls):
- जो योग्य जीवनसाथी की कामना करती हैं।
- सोलह सोमवार व्रत करने से उत्तम वर की प्राप्ति होती है।
- माता पार्वती ने भी शिवजी को पाने के लिए यह व्रत किया था।
2. विवाहित महिलाएँ (Married Women):
- पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख के लिए।
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि हेतु।
3. पुरुष (Men):
- जो जीवन में शांति, सफलता और आत्मिक शुद्धि चाहते हैं।
- नौकरी, व्यापार या किसी बड़ी समस्या से छुटकारा पाने के लिए।
- भगवान शिव की विशेष कृपा और आध्यात्मिक उन्नति के लिए।
4. बीमार या मानसिक अशांति से परेशान लोग:
- सोमवार व्रत और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति, स्वास्थ्य लाभ और डर/भय से छुटकारा मिलता है।
5. जिनकी कुंडली में चंद्र दोष या ग्रह दोष हों:
- यह व्रत श्रद्धा और विश्वास से करना चाहिए।
- व्रत में सात्त्विकता, संयम और शिव भक्ति अत्यंत आवश्यक है।
- यदि कोई व्यक्ति पूर्ण उपवास न कर सके, तो फलाहार करके भी यह व्रत कर सकता है।
- यह व्रत श्रद्धा और विश्वास से करना चाहिए।\
- व्रत में सात्त्विकता, संयम और शिव भक्ति अत्यंत आवश्यक है।
- यदि कोई व्यक्ति पूर्ण उपवास न कर सके, तो फलाहार करके भी यह व्रत कर सकता है।